Saturday, 7 September 2013

फेलोशिप ही चल रही है............................

मुझे अब लग रहा है की मेरी भी फेलोशिप ही चल रही है| काउन्सलिंग कोर्स में इमोशन, विचारो के बाते होती रहती है, की मै क्या सोच और कौनसी भावना मेरे दिल-दिमाग में चल रही है| विपश्यना में तो इसे प्रत्येक्ष भाव से देखने के लिए कहा गया है, की जो सोच और भावना पैदा हो रही है उसे जैसे की वैसा ही महूसस करे| उसके प्रति कोई भी विचार ना दर्शाए|

काउन्सलिंग में तो इसी को लेते हुए बात तो कर रहे है लेकिन उसके साथ-साथ कुछ दुसरे तरीके के टेक्निक्स की भी बात होती है, जिसमे हम अपने समस्याओ को नाकी ऐसे देखे लेकिन उन समस्याओ को सुलझाने के लिए भी निर्णय लेने की क्षमता काउन्सलिंग के द्वारा दि जाती है|


अब तो में यही सबकुछ सीख रही हु लेकिन कोर्स के अनुसार मुझे अपने विचार, समस्या को देखने की जरुरत है इससे भी ज्यादा यह की मै अपने आप को समझू, मै जानु की मै क्या विचार-सोच चलती है| मुझे एकाध घटना देखते हुए मेरे मन मै क्या चलता है? इत्यादी बातो को जानके के लिए यह कोर्स को जानने के लिए कोर्स काफी मददगार है| 

Friday, 6 September 2013

सफर ट्रेन का.............

ट्रेन का सफर तो वैसे काफी आरामदायी होता है, और किसी दुसरे जगह में जल्दी पहुच पाते है| मुम्बई ट्रेन की बात करो तो काफी तकलीफ देने वाली है, लोगो की भीड़ तो सिर्फ देखने लायक होती है| ऐसे लगता है जैसे लोग युद्ध के लिए जा रहे हो| ऐसे भागते है जैसे उनके पीछे कोई लगा है और जैसे गाडी तो बस उन्हें अब छोडके ही जाने वाली है कभी ना लौटेगी| इस भीड में तो छोटे बच्चे, बुजुर्गो को तो सफ़र करना तो मुश्किल होता है|

आजकल महिलाए भी काम करने लगी है तो महिलाओं के लिए घर का काम उसके बाद बाहर काम करना तो रोज का युद्ध ही है और उसमे ट्रेन का सफर तो बहुत परेशान कर देनेवाला होता है| लेकिन मुंबई के लोगो के लिए तो रोज का ही सफ़र है| इसे वे झेल पाते है|

महिलाओं की बातो को सुनना तो मजेदार होता है, वे कई तरीको के बाते अपनी महिला मित्र से करती रहती है| आज ही सुन रही थी, एक महिला अपने दुसरे दोस्त से कह रही थी की, मेरी बच्ची तो खाना ही नहीं खाती, हम लोग उस दिन पार्टी में गए थे, उसने सिर्फ खाने में पापड़ खाए, घर आने के बाद अपने बेटी से कहा की तेरी लायकी नहीं है इस तरह के पार्टी में जाना, टमाटर का सूप तो पि लेती”, बच्चो के लिए कितना भी कुछ करू तो दिल जलने लगता है”| दूसरी वाली कह रही थी की आजकल, तो बाई (नौकरानी) मिलना कठिन होने लगा है”| इससे पता चलता है की, कपडे धोना कितना मुश्किल काम है वैसे तो घर के सारे लोगो के कपडे धोना तो वाकई में मुश्किल ही है|

एक लड़की फोनपर बात कर रही थी, सामने वाले से कह रही थी, “आज मा को मरे हुए, पाच साल हुए, पापा से कहा है की श्राद्ध करना है, किसी ब्राह्मण को खाना खिलाये और छत पर नैवेद्य दिखाए” पहले साल में जब नहीं किया था तो मा को कितना दुःख हुआ होगा” कैसे पता चलता होगा की मरे हुए लोगो को भी मरने के बाद दुःख होता है|

इतनी सारी डेढ़ सारी बाते होती रहती है| वे भी क्या करे की अपनी घर के दुःख घरवालो से कहना तो होता नहीं इसलिए फुरसत मिलते ही अपने महिलो मित्रो से बात करने का मौक़ा अच्छा होता है| वैसे तो ट्रेन में सफर के दौरान के यह वक़्त बात करने के लिए अच्छा ही होता है और समय भी कैसे निकलता है तो पता ही नहीं चलता| 


वैसे तो फर्स्ट क्लास के डिब्बों में बैठने वाली महिलाये, दुसरे डिब्बो में बैठेनेवाली महिलाओं से तुलना हमेशा करती है, जब भी कोई गलती से कोई महिला, बच्चे, अन्य लोग बैठ जाते है तो उन्हें पाहिले ही बताया जाता है की यह फर्स्ट क्लास का डिब्बा है| या फिर जब करते है तो उन्हें बैठने के लिए इनकार किया जाता है| 

Tuesday, 3 September 2013

आज शाळे मधे ५ वीच्या मुलांनसोबत खुप छान वेळ गेला. मुलांना इंग्रजी खुप आवडत. त्यामुळे त्यांच्यासोबत इंग्रजीच्या सवांदाची पकड लागावी म्हणून घेत होते. त्यावेळस प्रत्येकी एक – एक जोड़ी बोलवून घेत होते, त्या जोडीमधे एक मुलगा व मुलगी ठेवले होते. त्या दोघांना दोन्ही प्रश्न विचारायचे होते. त्यावेळस त्यांच्यासमोर काही इंग्रजी मधे प्रश्न ठेवले, ते असे;
-         What is your name?
-        What is your mother?
-       What is your father name?
-       What is your brother name?
-        What is your sister name?
मुलांनी ते खुप चांगल्या रितीने केले, त्यामधे त्यांना मजा सुद्धा येत होती. जी मुले प्रश्न विसरत होती किंवा उत्तर द्यायला जमत नव्हते तर बसलेली मुले सुद्धा त्यांना सांगत होती. पण तो सवांद छान झाला.
त्यावेळेस एका सवांदामधे मुलाने मुलीस प्रश्न केला की, तुझ्या आईचे नाव काय? (इंग्रजी मधे). त्यावेळेस ती अगदी स्तब्ध झाली.


१३ जानेवारी २०१३



कक्षा ६ थी के बच्चो को बकरी के बारे में लिखने के लिए कहा गया था, तो बच्चोने काफी अच्छी तरीके से उसे लिखा| उनके जो भी रोज के अनुभव जो बकरी के साथ है तो उन्होंने कागज के पन्नो में साझा किया है|

बकरी हमारे लिए उपयोगी है| वह एक पालतू जानवर है| उसकी दो मोटी-मोटी आँखे होती है| बकरी को चार पैर होते है| बकरी मांस, गेहू, रोटी, बुर का पाला, बेर खाती है| बकरी खाने के बिना नहीं रह सकती| बकरी पानी पीती है| बकरी से बछ्डा पैदा होता है| उसका बच्चा दूध पिता है| बच्चा जब छोटा होता है तो वो खाना नहीं खाता है| वह बड़ा होने का बाद दाना, रोटी खाता है| वह दूध पिता है| वह बड़ा हो जाने के बाद खाना खाता है फिर वह दूध देने लगता है| बकरी के दूध से चाय बनाते है| हमारे घर के पास बकरिया है| बकरी के बच्चे के साथ खेलने के लिए मजा आता है| बकरी खाने के बिना नहीं रह सकती| बकरी से गोबर मिलता है| गोबर को खेत में डाला जाता है| जिससे फसल अच्छी होती है| बकरी को सुबह-शाम बच्चे चराने के लिए लेके जाते है| कभी-कभी वह दुसरे के खेत में चरने के लिए जाती है|  कभी-कभी बकरी दूर चली जाती है, तो हम उसे जोर से आवाज देते है तो कितनी भी दूर हो तो पास आ जाती है| बकरी को कुत्ते से डर लगता है| बकरी को बेचते है तो कुछ धन मिलता| पर बकरी को बेचना नहीं चाहिए| बकरी नहीं होती तो दूध कहां से मिलता? बकरी हमें बहुत पसंद है|


आनेवाले १० साल में क्या-क्या बदलाव हो सकता है?

विकास
आनेवाले १० साल में बहुत बदलाव हो सकता है| जैसे अभी २०१३ वा साल चल रहा है| मार्च-अप्रैल तक हमारी परीक्षा चलती रहेगी| फिर में बोखला पाल पढने चला जाऊगां| भुवाली स्कूल में, मै दो महीने का महेमान हु| मेरे पिताजी कह रहे है की, “८ वी कक्षा पास करके मेरे लड़के को बोखला पाल पढ़ाऊंगा|” और में भी यही चाहता हु| मेरे पिताजी कह रहे है की, कक्षा ९ वी में पढ़ेगा तो मेरे लिए सायकिल खरीदने वाले है, फिर तू सायकिल पर बैठकर जाना, ९ वी, १० वी तक सायकिल का इस्तेमाल करना होगा, ११ वी से १५ वी तक के शिक्षा में बड़ी गाडी खरीदूंगा जैसे मोटर सायकिल खरीदूंगा|” फिर ट्रेनिंग करके नौकरी करूँगा | २१ या २२ साल में शादी करूँगा|  

नरेंद्र
हम यह साल पास हो  शहर के विद्यालय में जायेंगे और वहा पढाई शुरू करेंगे| शहर में लोग साथ होंगे, वहा का परिसर अलग होगा|

मंजुला

हमारे घर में किसी की शादी हो सकती है| वैसे तो हमारे घर में सारे बच्चे पढ़ रहे है लेकिन तो भी शादी की बात चल रही है|  हमारे परिवार में कोई किसी से लड़ाई-झगडे नहीं करते| सब मिल-जुलकर रहते है| हमारे गाव में गेहू हो रहे है| अभी तो होली आनेवाली है| हम होली धामधूम से मनाते है और अनेक त्यौहार होते है जैसे दीपावली, रक्षा-बंधन, आदि| बरसात के दिन में हमको बहुत अच्छा लगता है| कभी तो बरसात बहुत होती है तो कभी होती नहीं| बरसात के दिन में हम छाता लेकर नदियों को देखते है| चारो तरफ हरियाली-हरियाली होती है| 

टेम्पो के बिना.................


१३ फरवरी २०१३  

आज कक्षा सातवी के बच्चो ने टेम्पो के सवारी के बारे में लिखा......................... 

अरविंद

टेम्पो २ लाख रूपये में मिलता है| सबसे पहले टेम्पो खरदीने के लिए पैसे कमाने पड़ते है| मेरा दोस्त पूछता है की, टेम्पो खरदीना नहीं है क्या? मै कहता हु खरदीना है| मै पूछता हु की टेम्पो में कितना सवारिया बैठ सकते है? वह बोला लगभग १५ सवारिया बैठ सकते है| फिर उसने कहा की, मै अब टेम्पो खरीद लूँगा और उसने लाल रंग की टेम्पो खरीद ली| खेरवाडा से बिछीवाडा तक का किराया ३० रूपये है|

अनीता

टेम्पो में बैठकर आते तथा जाते है| आते है हो तो सामान लेकर आते है| कभी-कभी टेम्पो में भीड़ होती है| अगर गाडी नहीं मिली तो पैदल – पैदल जाते है| बहुत बार बच्चे टेम्पो में रोते है| टेम्पो में बैठकर लोग कपडे सिलवाने जाते है|

ममता, मनीषा

टेम्पो हमारे लिए लाभदायक है| टेम्पो एक पुरानी तथा उपयोगी चीज है| हम कभी-कभी टेम्पो में बैठकर खेरवाडा, बोखला जाते है| टेम्पो के तीन पहिये होते है| टेम्पो के किराये का ७ रुपये देते है| वह रुका हुआ जाता है| टेम्पो वाला एक दिन के ५००-६०० रुपये कमाता है| भुवाली के टेम्पो बहुत सवारी लिया करता है| टेम्पो बस स्टेंड पर खड़ा होता है| टेम्पो में १५ सवारी लेके जाते है|

टीना

टेम्पो एक यातायात का साधन है| अगर टेम्पो नहीं होता तो हमारे लिए समस्या होती| जो रोजाना आते-जाते है तो उनके लिए तो बड़ी समस्या होती है| घुमने जाने के लिये टेम्पो की आवश्यकता होती है| हम टेम्पो की वजह से एक स्थान से दुसरे स्थान में जा सकते है| टेम्पो वाले लड़कियों को चिढाते है| अगर टेम्पो में पेट्रोल नहीं होता तो टेम्पो चलाने में क्या मजा आता? टेम्पो स्टैंड पर एक के पीछे एक टेम्पो के नम्बर लगते है| कभी-कभी, अलग – अलग रुट में नम्बर लगाने से दो टेम्पो वाले के बिच झगडा हो जाता है|


मणी, तमन्ना, गायत्री और कामिनी

पीले रंग की टेम्पो अच्छी लगती है| छोटे टेम्पो बोखला तक जाता है| टेम्पो टी-टी करता है| टेम्पो में छोटे बच्चोको बिठाते नहीं, पर उसमें खड़े हो जाते है| आजकल टेम्पो के पाच पहिये होते है| टेम्पो भी खाना खाता है, उसका खाना पेट्रोल है| वह टायर के बिना चल नहीं सकता| मुझे टेम्पो में जाना पसंद है| टेम्पो के ऊपर लिखा होता है की, “आकाश में गडडी उड़े आकाश के वास्ते, सडक पर टेम्पो चले सवारी के वास्ते...................”

बसंती

हम टेम्पो में बैठकर खेरवाडा, डूंगरपुर, उदयपुर, बिछिवाडा आदि स्थान पर जाते है| टेम्पो में बैठकर कर कही पर भी जाते है| टेम्पो में भीड़ होती है| कभी-कभी टेम्पो का एक्सीडेंट भी हो जाता है| फिर लोगोंको काफी चोट भी पहुचती है| कोई मर भी जाते है| सवारियोंको ठूस-ठूस के भरते है| टेम्पो में इतने सवारी भर लिए जाते है की, कही भी खाली नहीं रहता| कभी-कभी टेम्पोवाला दारू पीकर चलाता है| टेम्पो में गेहू ले जाते है| रस्ते में कही सवारी हो तो उनके के लिए हॉर्न बजता है और सवारी टेम्पो में बेठने के लिए दौड़ते-दौड़ते आते है की कही टेम्पो निकल न जाए| टेम्पो में बैठने के लिए नम्बर नहीं लगते| सवारी झगड़-झगड़ कर टेम्पो में बैठ जाते है| शाम को टेम्पो वाला सवारी लेकर एक-एक स्थान पर सवारीयोंको छोड़कर फिर अपने घर पर आ जाते है| सुबह से निकलने से पहले टेम्पो को अच्छी तरह सजाकर अगरबत्ती लगाते है| बहुत सजाकर लेकर निकलते है तो रस्ते में सवारी मिलती है|

किरण, निशा, मनीषा, शिल्पा और कमला

टेम्पो के तीन पहिये होते है| टेम्पो में हम खेरवाडा जाते है| टेम्पो में हम अपना सामान लाते है| टेम्पो नहीं मिलता तो हम पैदल-पैदल जाते है| टेम्पो के अलावा जिप और अन्य गाडिया हाय – वे पर चलती है| हम खेरवाडा में १० रूपये में जाते है| कभी-कभी टेम्पो बिघड भी जाता है| तो एक्सीडेंट भी हो जाता है| रात को जाता है तो लाइट भी नहीं चलती तो अँधेरे में चल नहीं सकता| क्योंकि वह रात में गिर जाता है|

राहुल, सुनील

टेम्पो रोड पर चलती है| टेम्पो में लोग मेहमान जाते है| टेम्पो से लोग आते समय सब्जिया –फल लाते है| टेम्पो में अधिक सवारी न बैठे| वाहन चलाते समय फ़ोन का उपयोंग न करे| वाहन चालते समय सरबत पीकर गाडी न चलाये ड्रायवर को पता नहीं हो तो आगे गाडी जाकर सामने से दुसरे गाडी को टकराती है|

उर्वशी

टेम्पो को सुबह सफाई करते है| उसे अगरबत्ती लगाते है| उसके बाद ही गाडी चलती है और तभी ही टेम्पो वाला सवारी लेता है| कभी-कभी टेम्पो बिगड़ता| है| टेम्पो वाला दारू पीकर चलाता है तो टेम्पो गिर भी जाता है| टेम्पो जब नहीं था तब लोक पैदल तथा टाँगे का इस्तेमाल करते थे| अगर सवारी एक टेम्पो में से दुसरे टेम्पो चले जाए तो झगडा भी हो जाता है| किसी-किसी टेम्पो में टेप भी चलता है| मजा आता है| कभी-कभी पुलिस टेम्पो को पकड़ भी लेते है|

वंदना, राकेश

हमारे घर में कोई चीज नहीं होती तो हम खेरवाडा जाते है| टेम्पो पेट्रोल पिता तभी तो चलता है| टेम्पो के पांच पहिये होते है| टेम्पो भुट-भुट करता है| टेम्पो के लिए हम “रुको” यु कहते है| टेम्पो में पाच सिट होती है| टेम्पो में हम बैठकर बहुत प्रसन्न होते है|

सुकना

टेम्पो बहुत उपयोगी चीज है| हम रोड क्रोस करके टेम्पो में बैठते है| वह टेम्पो रुक-रुक कर जाता है| किसी-किसी टेम्पो में गाना चलता है, उसे हम सुनते है| फिर खेरवाडा आ जाते है| कोई ७ रुपया तो कोई १० रुपया किराया देते है| और फिर हम सामान लेके वापिस जाते है|

आशा

टेक्सी नहीं मिलती तो टेम्पो में जाते है| खेरवाडा में हम ५ रूपये देकर जाते है| टेम्पो बहुत पुरानी चीज है| टेम्पो के आगे लम्बा हाथ किया जाये तो वो रुकता है|

करुना, मनीषा, सोनिया, सरला

अगर टेम्पो नहीं होता तो क्या होता? अगर टेम्पो नहीं मिलता तो हम पैदल-पैदल जाते है| हमें टेम्पो की बहुत आवशयकता होती है| जब टेम्पो में भीड़ होती है तो हम उसमे नहीं बैठ सकते है तो हम जीप में बैठकर जाते है| अगर टेम्पो नहीं होता हो खेरवाडा में जाने की आवश्यकता नहीं होती|  
अविनाश, अभिषेक

टेम्पो की रेंज १८० है| टेम्पो की चार सिट होती है| टेम्पो मै चलाना जानता हु और सिखा भी सकता हु| टेम्पो चलाने में बड़ी मुसीबत है| टेम्पो में दो ब्रेक तथा चार टायर आते है| टेम्पो तेज चलता है|

राहुल, महेंद्र

टेम्पो हमारे लिए एक अच्छी चीज है| वो डूंगरपुर या खेरवाडा ले जाता है| खेरवाडा से हम आलू, हरी सब्जी, टमाटर, रतालू, गोभी, मटर, मिर्ची आदी लाते है| जब कही जाना हो तो टेम्पो वाला पूछता है की कहा जाना चाहते हो? तो में बोलता हु के मुझे खेरवाडा जाना है| तो बातो-बातो में खेरवाडा आ जाता है| हम टेम्पो से उतरकर अंकल जी से पूछते है की, “आपके कितने पैसे हुए?”  अंकल जी कहते है की, ७ रुपये हुए है| फिर मै जेब से पैसे निकालकर उन्हें दे देते है|
हम बाजार गए तो दो पेन खरीदे| एक कॉपी खरीदी| अंकल जी को ३० रुपये दिए| १० रुपये की, पानपुड़ी खाई| मुझे रस्ते में दोस्त मिल गए तो वो पूछने लगे की, क्या करने आया हु? मै कहता हु की घुमने आया हु| फिर उसके बाद घर आया और घर आकर कुछ काम किया|

चन्द्रशेखर

टेम्पो सवारी बैठाने के काम में आता है| टेम्पो १ लाख रूपये में आता है| टेम्पो पैसे कमाने के काम आता है| टेम्पो में २० सवारी बिठाते है| कोई किराया ५ रूपये देता है तो कोई १० रूपये देता है| कई सारे टेम्पो वाले ५ रूपये में नहीं बिठाते है, वे १० रूपये लेते है|

अंजली

टेम्पो सभी सवारियों को लेके जाता है सभी नहीं मतलब टेम्पो में जितने सवारी बैठ सकते है इतने ही लेके जाता है| टेम्पो कुछ ज्यादा सवारी हो जाते तो टेम्पो सडक पर आता है तो टेम्पो वाला मेरे पास सवारी ज्यादा हो गए है यु करके उस टेम्पो में जितने सवारी बराबर बैठ गए तो दुसरे सवारियों को बैठने की जगह नहीं होती तो टेम्पो वाला अपना टेम्पो नहीं रुकाता है क्योंकि टेम्पो में सवारी ज्यादा हो जाते है तो टेम्पो पलटी खा जाता है, तो टेम्पो में बैठे हुए कुछ सवारियों में से कुछ लोग मर जाते है और कुछ घायल भी हो जाते है| कभी-कभी ऐसा भी होता है की, ९-१० सवारी जैसे होते है वैसे ही रहते है| कभी-कभी टेम्पो वाला सवारियों को यु बोलता है की, “सवारियों आओ तो वेलकम जाओ”| हम टेम्पो में बैठते है तो बहुत सुहावनी हवा लगती है मतलब गर्मियों के मौसम में जब टेम्पो बस स्टेंड पर खड़ा होता है, टेम्पो वाला तो लोगोंको को बोलता है की, “टेम्पो में बैठ जाओ”|

मनोहर

हम टेम्पो वाले को कहते है की, हमको खेरवाडा लेके जाओ, तो पूछते है की, की कितने पैसे लोगे? वो कहता है की, १ रुपया लेगा| वो कहता है की. चलो बैठ जाओ| हम बोलते है की हमें जल्दी जाने दो|” खेरवाड़ा आ जाता है| खेरवाडा से सब्जी, आलू, टमाटर, गोभी, टमाटर, भिन्डी, मिर्ची, केले, पपीता, बैंगन  और अंगूर, एक-एक किलो लेते है| अब क्या बाकी है? मीठी-मीठी लस्सी पीनी है| चलो पिलो, पीकर चल पड़े| फिर हम टेम्पो में बैठ गए, आधे रस्ते में ही टायर फुट गया| ड्रायवर जोर- जोर से रोने लगा क्योंकि  ड्रायवर का हाथ टूट  गया| फिर १०८ को फ़ोन करके उसे दवाखाना लेके गए|



                      

दिन २६ जनवरी का.................

२६ जनवरी का दिन बच्चोंके लिए काफी यादगार रहा| आज मैंने ६ से ७ के कक्षा में सारे बच्चोंको २६ जनवरी के बारे में लिखने के लिए कहा| तो बच्चोने काफी बेहतरीन लिखा|
बच्चे लिखते है की, २६ जनवरी गणतंत्र दिवस कहलाता है| २६ जनवरी की सुबह अच्छी लगी| सुबह में अध्यापक आये और उन्होंने माइक-स्पीकर लगाया| सबसे पहला झंडा लहराया और कार्यकृम शुरू किया|
एक लड़का कहता है की, २६ जनवरी की तैयारी अध्यापकोंके माध्यम से जमकर तैयारी की जिसके लिए हम सब मिलकर धन्यवाद देते है| हमारे नाटक की तैयारी भी ५ दिन पहले ही अध्यापक ने करायी| हमारे स्कूल के लडकोने नाटक भी किया जिससे मुझे बहुत आनंद आया|
एक लड़की लिखती है की, २६ जनवरी के दिन ३ गाने प्रस्तुत किये गए थे, जिसमे ताल से ताल मिला, हम सब भारतीय है और पियरियो प्यारो लगे मारी, यह तीन गाने मुझे काफी अच्छे लगे तो उस दिन से वे मेरे फेवरेट बने है|
झंडा लहराता हुआ स्कूल में.....................................
इस कार्यकृम में गाव के सारे लोग पधारे थे और आंगनवाडी की सेविकाए भी पधारी थी| जिससे २६ जनवरी का माहौल बना था| लड्कियोने गाने तथा डांस किया था| डांस करनेवाली कुछ लड्कियोने साड़ी पहनी थी| एक लडके ने दारुडीये की भूमिका भी की थी|
एक विद्यार्थी लिखता है की, नाटक देखने से लोगोंको काफी ख़ुशी हुई| हमारे प्रधानाध्यापक ने कुछ बाते स्कूल के टॉयलेट के बारे में बताई और उसके साथ-साथ लोगोने भी कुछ बाते उससे जुड़कर कही की, “विद्यालय के भवन में या टॉयलेट में कोई भी लोग गंदगी नहीं फैलाएगा” यह गाव वालोने वादा किया और विद्यालय की परकोटे बनाने की बात भी बताई|
एक बच्चा जो गाने के लिए था तो वो कहता है की, स्कूल में आने के बाद मेरा नाम बोला गया तो मैंने गाना गाया और मुझे उस कार्यकृम में गट्टू (गाव के नागरिक) जी ने १० रुपये इनाम दिया|

कार्यकृम ख़त्म होने के बाद सारे बच्चोंको मूंगफली बाटी गई| फिर सब लोग नौ दो ग्यारह हो गए और कक्षा ८ के बच्चे क्रिकेट खेलने गए| अंत में शाम को झंडा उतारा गया|